Tracking the Surge in Fraudulent Indian EdTech Subscription Traps.
“आपका बच्चा मैथ्स में कमज़ोर है, अगर आपने ये कोडिंग क्लास नहीं ली, तो वह ज़िंदगी में पीछे रह जाएगा।” या फिर, “हमारा डेटा साइंस कोर्स ज्वाइन कीजिए, 100% जॉब की गारंटी और जॉब लगने तक कोई फीस नहीं।”
चाहे आप अपने छोटे बच्चे के भविष्य को लेकर परेशान माता-पिता हों, या जॉब ढूंढ रहा एक कॉलेज स्टूडेंट— ‘एडटेक’ (EdTech – Education Technology) कंपनियों के सेल्समैन आपके इसी डर और सपनों का फायदा उठाते हैं। कोरोना के बाद भारत में एजुकेशन ऐप्स का एक बहुत बड़ा बूम (Boom) आया। लेकिन पढ़ाई के इस नए तरीके के पीछे एक बहुत बड़ा फाइनेंशियल फ्रॉड (Financial Fraud) भी पनप रहा है।
शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) की एडवायज़री और हाल ही में सामने आए पुलिस केसेस (जैसे बेंगलुरु के एक एडटेक CEO की 18 करोड़ के स्कैम में गिरफ्तारी) यह बताते हैं कि ये कंपनियां अब शिक्षा नहीं, बल्कि ‘ऑटो-डेबिट ट्रैप’ (Auto-Debit Trap) और ‘हिडन लोन’ (Hidden Loans) का धंधा कर रही हैं। आज हम इस पूरे एजुकेशन स्कैम का एक सिंपल डिकोड करेंगे, ताकि आप समझ सकें कि एक ‘फ्री’ क्लास के चक्कर में आप सालों के कर्ज़ में कैसे डूब सकते हैं।
द बेट (The Bait): ‘फ्री ट्रायल’ और स्कॉलरशिप का लालच
इस स्कैम की शुरुआत एक बहुत ही मीठे ऑफर से होती है। कोई सेल्समैन आपके घर आता है या आपको फोन करता है। वह कहता है कि उनके ऐप पर 15 दिन का ‘फ्री ट्रायल’ चल रहा है, साथ में बच्चे की पढ़ाई के लिए एक टैबलेट (Tablet) भी फ्री मिलेगा। कॉलेज स्टूडेंट्स के मामले में, वे “100% स्कॉलरशिप” या “इनकम शेयर एग्रीमेंट (ISA)” का लालच देते हैं कि “कोर्स अभी फ्री में कर लो, जब जॉब लग जाए तब पैसे देना।” एक आम इंसान इस ‘फ्री’ शब्द के लालच में आ जाता है और उनके एग्रीमेंट पर साइन कर देता है।
द हिडन लोन (The Hidden Loan): बिना बताए आपके नाम पर कर्ज
यहीं पर सबसे बड़ा धोखा होता है। जब सेल्समैन आपसे “सिर्फ रजिस्ट्रेशन” के नाम पर आपका आधार कार्ड, पैन कार्ड (PAN Card) और एक कैंसल चेक (Cancelled Cheque) मांगता है, तो वह असल में आपका रजिस्ट्रेशन नहीं कर रहा होता।
वह आपके डाक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके किसी ‘थर्ड-पार्टी फाइनेंस कंपनी’ (NBFC) से आपके नाम पर लाखों रुपये का पर्सनल लोन (Education Loan) ले लेता है। आपको बताया जाता है कि आप कंपनी को हर महीने 2,000 रुपये की ‘मासिक फीस’ दे रहे हैं, लेकिन हकीकत में आप उस फाइनेंस कंपनी की EMI भर रहे होते हैं। सेल्समैन जानबूझकर आपको यह नहीं बताता कि आपने एक ‘लोन एग्रीमेंट’ साइन किया है।
द ऑटो-डेबिट ट्रैप (The Auto-Debit Trap): बैंक से अपने आप कटते पैसे जब आप 15 दिन बाद कहते हैं कि “मुझे आपका कोर्स पसंद नहीं आया, इसे कैंसिल कर दो,” तो सेल्समैन आपका फोन उठाना बंद कर देता है। आप ऐप में कैंसिलेशन का बटन ढूंढते हैं, जो जानबूझकर छिपाया गया होता है (इसे Dark Pattern कहते हैं)।
चूँकि शुरुआत में आपने उन्हें कैंसल चेक और बैंक का ‘NACH (National Automated Clearing House)’ मैंडेट साइन करके दिया था, इसलिए अब आपके बैंक अकाउंट से हर महीने अपने आप EMI कटने लगती है। आप कंपनी को ईमेल करते थक जाते हैं, लेकिन पैसे कटना बंद नहीं होते।
अगर आप अपना बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं ताकि पैसे न कटें, तो आपका ‘सिबिल स्कोर’ (CIBIL Score) हमेशा के लिए खराब हो जाता है और फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट्स आपको फोन करके गालियां देना और धमकाना शुरू कर देते हैं। एक “फ्री कोर्स” आपको डिप्रेशन और कर्ज़ के जाल में फंसा देता है।
रेड फ्लैग्स (Red Flags): इस एजुकेशन स्कैम को कैसे पहचानें?
अपने बच्चों या खुद के लिए कोई भी ऑनलाइन कोर्स खरीदने से पहले इन ‘खतरे के निशानों’ (Red Flags) को ज़रूर चेक करें:
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पैन कार्ड और कैंसल चेक मांगना: अगर कोई एडटेक ऐप सिर्फ ‘कोर्स एक्सेस’ देने के लिए आपसे आपका पैन कार्ड, सैलरी स्लिप या बैंक का कैंसल चेक मांग रहा है, तो 100% वह आपके नाम पर लोन चालू करने वाला है।
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‘ऑटो-डेबिट’ (Auto-Debit) के लिए दबाव: अगर सेल्समैन कहे कि “सर, पेमेंट तो सिर्फ आपके अकाउंट से ऑटो-डेबिट (EFT/NACH) ही हो सकती है, आप खुद हर महीने पे नहीं कर सकते”, तो तुरंत डील कैंसिल कर दें।
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जॉब गारंटी (Job Guarantee) का झूठ: कोई भी असली यूनिवर्सिटी या कोर्स आपको 100% जॉब की लीगल गारंटी नहीं दे सकता। अगर वे स्टाम्प पेपर पर भी लिखकर दे रहे हैं, तो उसमें इतनी ‘छुपी हुई शर्तें’ (Terms & Conditions) होती हैं कि आप कभी उसे कोर्ट में साबित नहीं कर पाएंगे।
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हड़बड़ी (Urgency) पैदा करना: “सर, ये 50% डिस्काउंट और फ्री टैबलेट का ऑफर सिर्फ आज रात 12 बजे तक है।” जहाँ आपको सोचने का समय न दिया जाए, समझ लीजिए कि वहाँ फ्रॉड है।
द डिफेन्स ब्लूप्रिंट: फंस गए हैं तो खुद को कैसे बचाएं?
अगर आपने गलती से कोई कोर्स ले लिया है और पैसे कट रहे हैं, तो रोने या परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। इन ‘ज़ीरो-ट्रस्ट’ (Zero-Trust) रूल्स को फॉलो करें:
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बैंक जाकर ‘मैंडेट’ (Mandate) कैंसिल कराएं: सबसे पहला काम यह करें कि तुरंत अपनी बैंक ब्रांच में जाएं और मैनेजर को लिखित में दें कि इस एडटेक कंपनी का ‘NACH Mandate / Auto-debit’ तुरंत कैंसिल किया जाए। इसके बाद आपके खाते से पैसे कटना बंद हो जाएंगे।
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NBFC (लोन कंपनी) से बात करें: पता लगाएं कि आपके नाम पर किस फाइनेंस कंपनी ने लोन चालू किया है (यह आपके CIBIL रिपोर्ट में दिख जाएगा)। उस कंपनी को ईमेल करें कि “मुझे इस लोन के बारे में गुमराह किया गया था और मैंने सर्विस कैंसिल कर दी है।”
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कंज्यूमर फोरम (Consumer Forum) में शिकायत: नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) पर कॉल करें या उनकी वेबसाइट पर जाकर उस एडटेक कंपनी के खिलाफ ‘Unfair Trade Practice’ (धोखाधड़ी) की शिकायत दर्ज कराएं। सरकार इन कंपनियों को लेकर बहुत सख्त है और शिकायत करने पर अक्सर रिफंड मिल जाता है।
द रोड अहेड: पढ़ाई के लिए कर्ज़ नहीं, समझदारी चुनें
एजुकेशन आज के समय में एक बहुत बड़ा बिज़नेस बन चुका है। अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पेरेंट्स अपनी ज़िंदगी भर की कमाई लुटाने को तैयार रहते हैं, और ये स्कैमर्स इसी इमोशन का फायदा उठाते हैं। कोई भी टैबलेट या ऐप आपके बच्चे को रातों-रात आइंस्टीन (Einstein) नहीं बना सकता। “फ्री” के लालच में कोई भी एग्रीमेंट बिना पढ़े साइन न करें। आपकी एक छोटी सी ‘ना’ (No), आपको लाखों के कर्ज़ और सालों के मानसिक तनाव से बचा सकती है।